Time Report Ground Zero Amroha : यूपी के अमरोहा जनपद के चुचैला कलां कस्बे में तीन दोस्तों ने अपने साथी को ही मौत के घाट उतार दिया। घटना को नेचुरल मौत में बदलने के लिए नई कहानी भी गढ़ ली। लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट से घटना का पर्दाफाश हो गया। हत्या करने वाले तीनों आरोपी 19 से 21 साल के है। तीनों शिक्षा से वंचित है। सस्ते नशे के आदी है। सस्ते नशे से मतलब ट्यूब व कैप्सूल के नशे से है। यह कोई क्राइम का पहला केस नही है। अमरोहा जिले का यह कस्बा नशे की जद में है। यहां निवास करने वाले निम्न वर्गीय परिवारों के 40 फीसदी बच्चे नशे में लिप्त है। कॉउंसिल न होने जागरूकता और इस पर रोक थाम को लेकर उचित कदम नही उठाने से इनकी तादाद बढ़ती जा रही है।
आज के वक्त में नवयुवाओं में नशे की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। अगर जिले में पांच साल में हुई घटनाओं की केस स्टडी की जाए तो दर्जन भर से ज्यादा केस में आरोपी नशे की प्रवृत्ति वाले होंगे। जिले में 13 से 21 साल तक के नवयुवाओं में इन दिनों सस्ते नशे की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है। नशे की गिरफ्त में यह युवा अब केवल चोरी की घटनाओं तक ही सीमित नही है। हार्ड क्राइम तक में इनकी संलिप्ता बढ़ रही है। यह समाज के लिए तो नुकसानदायक है ही आने वाली नई नस्लों को भी खोखला कर रहे है। इसी को लेकर Time Report की टीम पड़ताल करने अमरोहा जिले के कस्बा चुचैला कलां में पहुंची और नशे की ओर बढ़ रही युवा पीढ़ी के पीछे के कारणों को जानने की कोशिश की।
चुचैला कलां कस्बे में पहुंचने के बाद हम अलग अलग मोहल्ले में गए यहां जिम्मेदार लोगों से बातचीत की। यहां कुल 15 मोहल्ले है। कोई मोहल्ला ऐसा नही है जहां के नव युवा सस्ते नशे की गिरफ्त में न हो। हम ने हर मोहल्ले के जिम्मेदार लोगों से नई पीढ़ी के नशे की ओर बढ़ते कदमों के कारणों को जानने की कोशिश की। लेकिन इससे पहले हमने नशा कहां से और कैसे उपलब्ध होता है यह जानने की कोशश की।
Amroha : यहां मिलता है सस्ता नशा
नशे की जद में आई यह नई पीढ़ी भांग और पॉलीथिन के जरिए सिलोचन ट्यूब का नशा करती है। ( सिलोचन ट्यूब पंचर जोड़ने के काम आती है) इस नशे की वजह यह सस्ता है और बहुत हार्ड है। साथ ही आसानी से उपलब्ध है। जो परचून की 70 फीसद दुकानों पर मिल सकता है। दूसरा नशा कैप्सूल और इंजेक्शन का है यह थोड़ा महंगा है। आसानी से उपलब्ध भी नही है। हर किसी को मेडिकल संचालक इसको देते भी नही है। पड़ताल में सामने आया कि कुछ परचून के दुकानदार ऐसे है कि जिनकी दिनभर की ठीक ठाक सेल है। फिर भी वें चंद पैसों के लालच में नई नस्ल को खोखला करने में अपना योगदान इतिहास में दर्ज करा रहे है।
चुचैला कलां अमरोहा ( Amroha ) जिले की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत है, जो हरिद्वार और दिल्ली को जोड़ने वाले स्टेट हाइवे पर स्थित है। यहां की आबादी करीब 30 हजार है। मतदाताओं की संख्या 9500 है। कस्बे में सभी धर्मों की कुल 37 बिरादरी निवास करती है। यहां के लोग साझा संस्कृति के साथ रहते है। कस्बा मुस्लिम बाहुल्य कहलाता है लेकिन धर्म के हिसाब से आबादी का रेशों 60 : 40 है।
Amroha : नशे से कैसे रुके युवा पीढ़ी
नशे की ओर तेजी से बढ़ती नई पीढ़ी को रोकने के लिए समाज के हर जिम्मेदार व्यक्ति को आगे आना होगा। अपने बच्चों के चाल चलन पर पैनी नजर रखनी होगी। उन्हें फ्री छोड़ना मतलब जान बूझकर उनको कुएं में धकेलना है। अगर समय रहते इस पर अंकुश नही लगाया गया तो यह नई पीढ़ी और समाज को खोखला कर देगा। नईम चौधरी, सामाजिक प्रहरी
नशे की दलदल में फंस रही नई पीढ़ी के लिए हम खुद जिम्मेदार है। क्योंकि हम अपने बच्चों की जिम्मेदारियों से दूर भाग रहे है। बच्चे क्या कर रहे मां बाप को पता ही नही।एक बच्चा कुछ कमाता नही और वह पैसे लाता कहां से है कोई शौक करता है उससे कोई पूछता नही यह आया कहां से है। इन्हीं छोटी और अनदेखी आदतों की वजह से नई पीढ़ी नशे की लत में पड़ कर तबाह हो रही और समाज को खोखला कर रही है। समाज के हर जिम्मेदार व्यक्ति को नशे की दल दल में धंस रही नई पीढ़ी को बचाने के लिए आगे आना होगा। साथ ही आसानी से दुकानों पर मिलने वाले नशे की चैन को तोड़ना होगा। डा. जनाबुद्दीन सैफी
Amroha : नशे की तोड़ने होगी चेन
नशे से जुड़े नवयुवाओं में 70 फीसदी निम्न वर्गीय परिवारों से है। कोई रोक टोक और डांट वाला भी नही है। जिससे भय और डर उनके अंदर से खत्म हो चुका है। परिवारों की आर्थिक स्थिति भी डमाडोल है। जिसने उनको बेगाना बना दिया है। जिस कारण वह कुछ भी करने को आजाद है। इनको नशे से रोकने के लिए आसानी से उपलब्ध होने वाले नशे की चेन को तोड़ना होगा। आसानी से नशा नही मिलने पर इस पर अंकुश लगने में काफी हद तक सफलता मिलेगी।
आरिफ कुरैशी फैजी एडवोकेट, उपाध्यक्ष बार एसोसिएशन जनपद अमरोहा
Amroha : अच्छा समाज सभी के लिए फायदेमंद
चंद पैसों के लालच में अगर दुकानदार समाज को खोखला करने वाला समान बेच रहे है तो यह गलत है। वह भी इसी समाज का हिस्सा है। एक अच्छा और स्वच्छ समाज सभी के बेहतर प्रयासों से मिलकर बनता है। नशे की जद में आने वाली पीढ़ी में एक दिन उनकी खुद की भी इसमें शामिल हो सकती है। इसलिए उन्हें चाहिए कि इस पर स्वंय ही तत्काल रोक लगा दे।
फईम सैफी, युवा नेता
Amroha : युवा देश व समाज की रीढ़
किसी भी देश का भविष्य युवाओं को माना जाता है। भारत को युवाओं का देश कहा जाता है। दुनिया में सबसे अधिक युवा आबादी भारत में है। इसलिए, देश की प्रगति के लिए युवाओं का सही कदम पर चलना जरूरी होता है। लेकिन पिछले कुछ सालों से युवा पीढ़ी नशे की दलदल में फंस चुकी है। युवा नशे के आदी हो चुके है। जिससे समाज और नई पीढ़ी खात्मे की ओर जा रही है। इस पर रोक के लिए नशे की चैन को तोड़ना होगा और समाज को जागरूक करना होगा।
मोहसिन सैफी, यूथ आइकन
जागरूकता अभियान की जरूरत
युवाओं में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति को रोकने के लिए समाज के साथ ही सरकार को भी आगे आना होगा। नशे से संबंधित सामानों पर सख्ती से पूर्णत: प्रतिबंध लगाना होगा। इसके अलावा सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया व सामाजिक संस्थाओं के साथ मिलकर जागरूकता अभियान चलाए जाने की जरूरत है। समाज को स्वच्छ और स्वस्थ बनाने के लिए केवल सरकार की ही नही समाज के हर व्यक्ति की भी जिम्मेदारी है।
प्रेम कुमार त्यागी, सोशल एक्टिविस्ट
Amroha : नशा समाज के नाश की जड़
नशा, नाश की जड़ है। नशा ट्यूब, कैप्सूल का हो या कोई दूसरा, नशा मनुष्य को तो बर्बाद करने का नाश करता ही है। यह समाज को भी खोखला कर रहा है। इससे आने वाली नई पीढ़ी तबाह हो रही है। जो समाज के लिए बड़ा नुकसान है। साथ ही नशे की जद में आने वाली यह पीढ़ी खुद को नाश करने के साथ समाज को भी नुकसान पहुंचा रही है। अगर समय रहते समाज जागरूक नही हुआ और इसको नही रोका गया तो भयावह परिणाम होंगे। नशा बेचने वालों को भी अपना जमीर जगाना होगा, केवल नशा बेचने से ही उनका पेट नही भरेगा।
मुंशी इरफान अली, सामाजिक प्रहरी
नशे के आदी थे तीनों हत्यारोपी
मोहल्ले वालों से बात करने पर पता चला अमन के हत्यारोपी अजीम, फैसल व फैजान तीनों सिलोचन ट्यूब व कैप्सूल का नशा करते थे। इनका उठना बैठना भी नशे से प्रभावित लोगों में ही था। मोहल्ले के जिम्मेदार लोगों के समझाने के बाद भी इन पर किसी का कोई असर नही होता था। इनके अलावा भी दर्जन भर के करीब नवयुवा नशे की जद में है। कस्बे का कोई भी ऐसा मोहल्ला नही है। जहां नशे से जुड़े युवा नही है।

अमन से कैसे हुई दोस्ती
परिवार व मोहल्ले के लोग कहते है अमन से तीनों की दोस्ती कोई स्थायी नही थी। तीनों के घर अमन के आसपास ही थे इस लिहाज से ही अमन उनसे बोल लेता था। फैसल ने पिता की मौत के बाद नशे की शुरुआत की थी। जब अमन ईद मनाने दिल्ली से घर आया तो अगले दिन शुक्रवार को फैसल ही यह कहकर बहुत गर्मी है ट्यूवेल पर नहलाने के बहाने उसको साथ ले गया था। अजीम व फैजान घर के बाहर ही थे। अजीम व फैजान के बारे में नशा करने की सब को जानकारी थी लेकिन फैसल के नशा करने के बारे में कुछ ही लोग जानते थे। इसलिए परिजनों ने भी फैसल के साथ जाने से मना नही किया था। लेकिन किसी को इस बात का यकीन नही था कि यह इतना बड़ा क्राइम कर सकते है। जहीर सैफी बताते है कि मोहल्ले में और भी कई ऐसे नवयुवा है जो बुरी तरह नशे की गिरफ्त में है।
क्राइम की ओर बढ़ते कदम….
एक पुलिस अधिकारी बताते है कि नशे की जद में आ रही नई पीढ़ी क्राइम की ओर बढ़ रही है। सरकार की सख्ती के बाद चोरी व क्राइम की घटनाओं पर काफी हद तक अंकुश तो लगा लेकिन नशे की जद में आई इस नई पीढ़ी की चोरी की घटनाओं में संलिप्ता बहुत ज्यादा बढ़ी है। जैसे ही मौका मिला नशे के लिए घरों व दुकान पर हाथ साफ कर देते है। इनमें 60 फीसदी नाबालिग है जिनकी उम्र 14 से 17 साल है। वह कहते है कि इसे रोकने के लिए समाज के जिम्मेदार लोगों को आगे आना होगा। हर परिवार के जिम्मेदार को अपने बच्चों सहित पड़ोस के बच्चों पर भी नजर रखनी होगा और इसे रोकने लिए कदम पीछे खींचने की बजाए आगे बढ़ाने होंगे।